Wednesday, October 17, 2018

सऊदी अरब के बिछड़ने से क्यों डरते हैं ट्रंप

अल-जज़ीरा ने लिखा है, ''कई आलोचकों का ये भी कहना है कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी भारत के विविधिता से भरे इतिहास और पहचान को मिटाने की कोशिश कर रही है. उत्तर प्रदेश में एक महंत योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कई जगहों के नामों को बदलने का प्रस्ताव दिया है. योगी आदित्यनाथ के ऊपर भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने का आरोप लग चुका है.''
अल-जज़ीरा ने यह भी लिखा है, ''बीते साल उन्होंने मुग़लसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बीजेपी नेता दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रख दिया था. इसके साथ ही बरेली, कानपुर और आगरा के हवाई अड्डों के नामों को बदलने का प्रस्ताव दिपारंपरिक तौर पर अमरीका हमेशा नियमों का पालन करने वाला देश रहा है. इसे नेतृत्व का नैतिक उदाहरण माना जाता रहा है. दुनिया भर के देशों की ग़लत गतिविधियों पर अमरीका लगभग मुखर होकर सामने आया है.या गया है. उत्तर प्रदेश की 22 करोड़ लोगों की आबादी में मुसलमानों का प्रतिशत लगभग 19 फीसदी है.''ये ऐसा वक़्त है जब अमरीका में एक अदूरदर्शी स्थिति बनी हुई है. ट्रंप प्रशासन पर दुनिया भर में हो रही नाइंसाफ़ी की वारदातों पर तमाशबीन बनकर देखते रहने के आरोप लग रहे हैं.
अमरीका इस मामले में अकेला नहीं है. चीनी इंटरपोल के प्रमुख मेंग हॉन्गवी को चीन प्रशासन के नज़रबंद करने का मामला या सैलिसबरी में केमिकल हमले में क्रेमलिन के संलिप्त होने के सुराग़ हो. इन सभी मामलों पर सरकारों ने चुप रहना ही ठीक समझा.
इसी कड़ी में बड़ा मामला सऊदी अरब के पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी के लापता होने का है. जमाल ख़ाशोज्जी दो अक्टूबर को तुर्की के अंकारा स्थित सऊदी अरब के वाणिज्यिक दूतावास गए और वहां से वापस नहीं लौटे. लेकिन अब तक राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, जिससे लगे कि वो मानवाधिकारों को लेकर चिंतित हैं.
दुनिया भर के देशों में अधिनायकवाद चरित्र वाले सत्ता पर क़ाबिज हो रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय नियमों को धत्ता बता रहे हैं. यह एक नए युग की शुरुआत है, जहां मूल्यों पर हित हावी हैं.